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सिर पर तेरा हाथ हो
दिल में तेरा वास हो।
जब आये आखरी वक्त मेरा,
तब सामने केदारनाथ हो।


हर पल तुम्हारा साथ हो
मुझमें तुम्हारा वक्त खास हो।
जब छूट जाए हाथ सबसे
तुम मेरे सामने भोलेनाथ हो।


तेरे दर पर आने की आस है
तेरे दर्शन की मन में प्यास है।
मेरी सांसों का मालिक है जो
नाम उसका भोलेनाथ है।



सब व्यस्त हैं मोह माया की बस्ती में
पर मैं खोया रहता हूं
महादेव की भक्ति में।


 इस दुनिया से मैं
बहुत विपरीत हु।
क्यो की मैं भोलेनाथ
के करीब हु।


माथे पर राख 
हाथों में रुद्राक्ष है।
अब तो मुझे भी जाना
पर्वत कैलाश है।



मेरे जीवन का अंतिम
सफर केदारनाथ है।
क्योंकि वही
बसे मेरे भोलेनाथ है।



तेरी शरण में आए हैं
हमारा भी उद्धार करो।
हे भोलेनाथ
मेरी भक्ति भी स्वीकार करो।






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